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Entertainment

‘मैं वापस आऊंगा’ मूवी रिव्यू

ऐक्टर: नसीरुद्दीन शाह,वेदांग रैना,दिलजीत दोसांझ,शर्वरी वाघ,बनीता संधू,रजित कपूर,मनीष चौधरी,अंजना सुखानी
श्रेणी:Hindi, रोमांस, पीरियड ड्रामा
डायरेक्टर :इम्तियाज अली
अवधि:2 Hrs 46 Min
रेटिंग: ★★★☆☆ (3/5)

‘मैं वापस आऊंगा’ मूवी रिव्यू

इश्क की अधिकांश अमर दास्तानें अधूरी ही रही हैं—चाहे वह रोमियो-जूलियट हों, लैला-मजनूं या हीर-रांझा। इन्हीं अधूरी मोहब्बतों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए निर्देशक इम्तियाज अली अपनी नई फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ लेकर आए हैं, जो प्रेम, बिछड़न और विस्थापन के दर्द को बेहद संवेदनशीलता से पर्दे पर उकेरती है।

करीब 78 वर्षों के लंबे कालखंड में फैली यह कहानी शुरुआत में एक खूबसूरती से सजी साधारण पीरियड लव स्टोरी प्रतीत होती है। जिया और कीनू के प्रेम प्रसंग को विस्तार से दिखाया गया है, लेकिन फिल्म का पहला हिस्सा अपेक्षाकृत धीमा है। कई दृश्य खिंचे हुए महसूस होते हैं और वर्तमान तथा अतीत के बीच लगातार आने-जाने वाली पटकथा कुछ जगहों पर भ्रम भी पैदा करती है।

अगर आप तेज रफ्तार फिल्मों के शौकीन हैं, तो शुरुआती भाग आपको थोड़ा निराश कर सकता है। हालांकि इंटरवल के बाद फिल्म पूरी तरह से अपनी लय पकड़ लेती है। दूसरे हिस्से में इम्तियाज अली कहानी को जिस भावनात्मक गहराई और संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ाते हैं, वह दर्शकों को अंत तक बांधे रखती है।

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका मानवीय पक्ष है। दुनिया भर में युद्धों और संघर्षों के कारण अपने घर, परिवार और प्रेम से दूर हो जाने वाले लोगों के दर्द को कहानी में बेहद प्रभावशाली ढंग से पिरोया गया है। यही पहलू फिल्म को एक सामान्य प्रेम कहानी से ऊपर उठाकर व्यापक सामाजिक संदर्भ प्रदान करता है।

अभिनय की बात करें तो नसीरुद्दीन शाह पूरी फिल्म पर अपनी अमिट छाप छोड़ते हैं। उनका अभिनय इतना सहज और प्रभावशाली है कि यह किसी भी अभिनेता के लिए एक मास्टरक्लास जैसा प्रतीत होता है। दिलजीत दोसांझ ने निर्वैर के किरदार में सादगी और ईमानदारी का सुंदर मेल प्रस्तुत किया है। वहीं, वेदांग रैना ने कीनू के जटिल और बहुआयामी चरित्र को पूरी निष्ठा के साथ निभाया है। शर्वरी जिया के किरदार में बेहद खूबसूरत, मासूम और प्रभावी लगती हैं।

सहायक कलाकारों में डॉली अहलूवालिया एक भावुक दृश्य में विशेष रूप से याद रह जाती हैं। वहीं रजत बेदी, बनीता संधू, मनीष चौधरी, रजित कपूर और अंजना सुखानी अपने सीमित स्क्रीन स्पेस में संतोषजनक प्रदर्शन करते हैं।

तकनीकी पक्षों में सिलवेस्टर फोंसेका की सिनेमैटोग्राफी उल्लेखनीय है। उनका कैमरा पुराने हिंदुस्तान की खूबसूरती और विभाजन के जख्मों दोनों को प्रभावशाली ढंग से कैद करता है। हालांकि एडिटर आरती बजाज और संगीतकार ए.आर. रहमान के काम में और अधिक प्रभाव की गुंजाइश महसूस होती है। फिर भी ‘मसकारा’ और ‘क्या कमाल है’ जैसे गीत फिल्म के भावनात्मक माहौल को मजबूत करते हैं।

क्यों देखें?

यदि आप इम्तियाज अली की फिल्मों के प्रशंसक हैं, संवेदनशील प्रेम कहानियां पसंद करते हैं या विस्थापन और बिछड़न के दर्द को महसूस करने वाली फिल्मों से जुड़ाव रखते हैं, तो ‘मैं वापस आऊंगा’ आपके लिए एक बेहतरीन सिनेमाई अनुभव साबित हो सकती है। साथ ही नसीरुद्दीन शाह की शानदार अदाकारी इस फिल्म को देखने का सबसे बड़ा कारण है।

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