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Entertainment

शोले : द फाइनल कट – समीक्षा

शोले : द फाइनल कट
जेन जी को मिला इंडियन सिनेमा की आइकॉनिक फिल्म को देखने का गोल्डन चांस

भारतीय सिनेमा की आइकॉनिक फिल्मों में शामिल और बॉक्स ऑफिस पर कामयाबी और कमाई के नए आयाम बनाने वाली
‘शोले’ को 50 साल हो गए हैं। इस खास मौके पर 1975 में बनी इस फिल्‍म ने एकबार फिर बड़े पर्दे पर धमाकेदार वापसी की है ।
इस बार ‘शोले- द फाइनल कट’ के नाम से री-रिलीज हुई इस फिल्‍म में बहुत कुछ ऐसा है, जो पिछली शोले में नहीं था। खासकर फिल्म के ऐसे कई सींस जिन्हें 1975 में इमरजेंसी के कारण सेंसर बोर्ड ने फिल्म से हटवाया या बदलवा दिया था इस बार फिल्म की री-रिलीज में बड़े पर्दे पर बहुत कुछ बदला हुआ होगा ।

मेरी नजर में इस फिल्म को एक बाद फिर देखने की एक बड़ी वजह इसका टेक्‍न‍िकल पक्ष भी है। यह फिल्‍म बड़े पर्दे के लिए पहली बार 4K क्‍वाल‍िटी में रिस्टोर की गई । याद रहे 50 साल पहले भी फिल्म कुछ सिनेमाघरों में 70mm रेशियो 2.2:1 में पेश की गई और अब इस फिल्म के ओरिजिनल नेगेटिव जो फिल्‍म हेरिटेज फाउंडेशन के पास बरसों से सुरक्षित रखे गए थे उन पर करीब ढाई साल तक काम करने के बाद अब मैग्नेटिक ट्रैक से बेहतर ऑडियो Dolby 5.1 में रिलीज किया गया है इस बार फिल्म में बहुत कुछ बदला हुआ और नया है सिर्फ इतना ही नहीं है। इस बार पर्दे पर आप ओरिजनल क्‍लाइमैक्‍स देखेंगे है जो राइटर सलीम-जावेद ने लिखा था, धर्मेंद्र, संजीव कुमार, अमिताभ बच्चन , अमजद खान , जया बच्‍चन, हेमा मालिनी,l स्‍टारर ‘शोले’ इमरजेंसी के दौर में रिलीज हुई थी। सेंसर बोर्ड ने फिल्म निर्माता को ओरिजिनल एंडिंग बदलने के लिए मजबूर किया था। ना चाहते हुए भी रमेश सिप्‍पी को क्‍लाइमैक्‍स सीन फिर से शूट करना पड़ा था। दरअसल, ओरिजनल क्लाइमेक्स में, ठाकुर (संजीव कुमार) को गब्बर सिंह (अमजद खान) को मारते हुए दिखाया गया था। वो भी अपने कील वाले जूतों से मसलकर। लेकिन सेंसर बोर्ड के दबाव में तब इसे बदला गया। पिछली ‘शोले’ के इस सीन उसी वक्त पुलिस आ जाती है और गब्बर अरेस्ट हो जाता है।इस फिल्म के पहले शूट हुए क्‍लाइमैक्‍स में गब्बर की मौत का सीन और इमाम साहब के बेटे अहमद की हत्‍या का सीन काफी लंबा था। तब सेंसर बोर्ड ने इन सीन्‍स पर कैंची चला दी थी। सेंसर बोर्ड का तर्क था ठाकुर द्वारा गब्‍बर सिंह को नुकीले जूतों से मारना और अमजद की हत्या के दृश्य बहुत हिंसक है।

इस फिल्म की री-रिलीज में कई नए दृश्य जोड़े तो ऐसे में फिल्म को एक बार फिर सेंसर सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। पिछले महीने सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन ने फिल्म को बिना किसी कट के इसे ‘U’ सर्टिफिकेट के साथ पास किया। यह फिल्‍म अब 209.05 मिनट की है। अब रिलीज़ हुई इस फिल्म की अवधि 3 घंटे, 29 मिनट और 5 सेकंड यानी करीब साढ़े तीन घंटे की हो गई है ।
50 साल पहले जब फिल्म रिलीज हुई फिल्म हुई थी तो इसकी अवधि 190 मिनट, यानी लगभग 3 घंटे 10 मिनट की थी।

वहीं फिल्म के एक दृश्य में वीरू जब बसंती को रिवाल्वर चलाना सीखाता है तो यहां जय के एक डायलॉग के ‘जेम्स बॉन्ड’ रेफरेंस को बदलकर ‘तात्या टोपे’ किया गया है।अब इस ऐतिहासिक सुपर हिट एवरग्रीन फिल्‍म को बिग स्क्रीन पर फिर से देखने का सुनहरी मौका है। फिल्‍म को 4 के पिक्‍चर क्‍वालिटी, डॉल्बी 5.1 साउंड, ओरिजनल क्‍लाइमैक्‍स, और कुछ ऐसे खास दृश्य जिन्हें फिल्म की अधिक लंबाई होने की वजह से मेकर ने काटा या फिर सेंसर बोर्ड ने इन पर ऐतराज किया तो उन्हें चेंज करना पड़ा अब इन्हीं सीन्‍स के साथ इस फिल्म देखना मेरी नजर में एक अलग अनुभव होगा। इन सब से परे, फिल्‍म में धर्मेंद्र हैं। बॉलीवुडके ही-मैन को पुराने रूप में सिनेमाघरों में एकबार फिर संजोने का ऐसा मौका है जो आपकी आँखें नम कर कर सकता है, और फिल्म की मेकिंग कंपनी इस बार फिल्म को मुंबई में ग्रैंड प्रीमियर में जय और वीरू की मौजूदगी के साथ रिलीज करना चाहती थी, बिग बी ने बहुत पहले ही हामी भर दी थी, इस बारे में सिप्पी फैमिली ने फिल्म की रिलीज डेट से करीब डेढ़ महीने पहले धर्मेंद्र से भी बात कर ली थी और धर्म पा जी झट हां कर दी थी, लेकिन नियति को शायद यह मंजूर नहीं था , यही वजह रही कि 50 साल बाद फिर से रिलीज हो रही इस फिल्म का यह आयोजन कैंसल करना पड़ा तो भरे मन से मेकर कम्पनी ने फिल्म की शुरुआत में धर्म पा जी को श्रद्धासुमन अर्पित करने के बाद फिल्म की शुरुआत के बाद फिल्म शुरू की। अगर आपने बरसो पहले इस फिल्म को एक नहीं कई बार देखा है तो भी इस बार फिल्म को एक चमकते और टोटली बदलाव और करीब बीस मिनट की बढ़ी हुई अवधि के साथ इस बार फिर देखे और अगर सिनेमा के 70 एम एम के बिग स्क्रीन पर इस ग्रेट फिल्म को नहीं देखा तो इस बार किसी भी सूरत में मिस न करे।

कलाकार: धर्मेंद्र, संजीव कुमार, अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, हेमा मालिनी, अमजद खान, असरानी, जगदीप आदि निर्माता: जी पी सिप्पी, निर्देशक: रमेश सिप्पी, संगीत: आर डी बर्मन, सेंसर: यू , अवधि: 210 मिनट,

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