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उत्तर प्रदेश

‘बल्क लैंड अलॉटमेंट पॉलिसी’ से यूपी को फॉर्च्यून ग्लोबल-500 कंपनियों का ‘पावरहब’ बनाने की तैयारी

-फॉर्च्यून ग्लोबल-500, फोर्ब्स ग्लोबल-2000, एशिया बेस्ट 200 की टॉप रैंकिंग वाली कंपनियों को भूमि आवंटन में सहूलियत देने के लिए नई पॉलिसी पर हो रहा काम

-यूपी में 100% एफडीआई व 100 करोड़ से ज्यादा का पूंजी निवेश करने वाली कंपनियों को मिलेगा लाभ

-3 वित्तीय वर्षों में 1000 करोड़ से अधिक के एवरेज रेवेन्यू के साथ ग्रोथ दर्ज करने वाली कंपनियों को मिलेगी वरीयता

-प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में इन दिग्गज कंपनियों द्वारा प्राइवेट इंडस्ट्रियल एरिया समेत विभिन्न सुविधआओं का हो सकेगा विकास

-लैंड पार्सल चयन, भू-आवंटन व अन्य सुविधाएं देने के लिए आईआईडीसी स्तरीय फास्ट ट्रैक अलॉटमेंट कमेटी प्रदान करेगी अनुमति

लखनऊ। देश के ‘मोस्ट फेवर्ड डेस्टिनेशन’ के तौर पर अपनी पहचान पुख्ता कर रहे उत्तर प्रदेश को फॉर्च्यून ग्लोबल-500 कंपनियों का पावरहब बनाने के लिए नई योजना पर कार्य हो रहा है। प्रदेश में बड़े निवेश वाली परियोजनाओं को त्वरित गति प्रदान करने के लिए विशेष तौर लैंड पार्सल चयन, भू-आवंटन समेत तमाम सुविधाएं देने के लिए सीएम योगी के विजन अनुरूप जल्द ही बल्क लैंड अलॉटमेंट पॉलिसी लायी जा सकती है। इसके जरिए, फॉर्च्यून ग्लोबल-500, फोर्ब्स ग्लोबल-2000, एशिया बेस्ट 200 व इकॉनमिक टाइम्स-200 की टॉप रैंकिंग वाली कंपनियों को भूमि आवंटन में सहूलियत देने का मार्ग प्रशस्त होगा।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश में पहले से ही प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पॉलिसी-2023 तथा फॉर्च्यून-500 कंपनियों के निवेश हेतु प्रोत्साहन नीति 2023 प्रभावी है, ऐसे में इन पॉलिसियों के अंतर्गत वर्गीकृत होने वाले निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए लैंड अलॉटमेंट व सब्सिडी प्रक्रिया को त्वरित रूप से पूरा करने में बल्क लैंड अलॉटमेंट पॉलिसी सहायक होगी।

कई दिग्गज कंपनियों के निवेश प्रस्तावों को मिलेगी गति
प्रदेश में सीएम योगी के नेतृत्व में बने निवेशपरक माहौल ने विश्व की दिग्गज कंपनियों का ध्यान उत्तर प्रदेश की ओर आकर्षित किया है। इसी क्रम में सिंगापुर की सेंबकॉर्प तथा जापान एपीएसईजेड व मारुबेनी जैसी डेवलपर कंपनियों ने प्रदेश में निवेश के लिए रुचि दिखाई है। ऐसे में, औद्योगिक क्षेत्रों में भू-उपलब्धता, हाई लैंड व डेवपमेंट कॉस्ट, इंडस्ट्री रेडी प्लग एंड प्ले फैसिलिटीज के विकास तथा अधिग्रण उपरांत भूमि विकास जैसी प्रक्रियाओं में होने वाली देरी को दूर करने के लिए बल्क लैंड अलॉटमेंट पॉलिसी को प्रयोग में लाया जाएगा। फिलहाल इसके ड्राफ्ट पर कार्य हो रहा है।

औद्योगिक क्षेत्रों के समग्र विकास को मिलेगा बढ़ावा
पॉलिसी के जरिए प्रतिस्पर्धी दरों पर प्लग एंड प्ले औद्योगिक क्षेत्रों के विकास, नए औद्योगिक क्षेत्रों में स्टेट ऑफ द आर्ट फैसिलिटीज के निर्माण, प्राइवेट इंडस्ट्रियल एरिया, इनोवेशन-रिसर्च व डेवलपमेंट सेंटर्स, स्किल सेंटर्स, लॉजिस्टिक्स सर्विसेस व कमर्शियल एक्टिविटीज समेत औद्योगिक क्षेत्रों के समग्र विकास व सीएसआर परियोजनाओं को गति देने में मदद मिलेगी।

उल्लेखनीय है कि लैंड पार्सल चयन, भू-आवंटन व अन्य सुविधाएं देने के लिए बन रही पॉलिसी के निर्माण के लिए इन्वेस्ट यूपी नोडल एजेंसी के तौर पर कार्य कर रही है, जबकि आईआईडीसी स्तरीय फास्ट ट्रैक अलॉटमेंट कमेटी पात्र परियोजनाओं को लाभ देने के लिए सतत निगरानी कर अनुमति प्रदान करेगी।

100% एफडीआई व 100 करोड़ से ज्यादा के पूंजी निवेश वाली कंपनियों को मिलेगा लाभ

– प्रस्तावित योजना के अनुसार, प्रदेश में 100% एफडीआई व 100 करोड़ से ज्यादा के पूंजी निवेश वाली कंपनियों को बल्क लैंड अलॉटमेंट पॉलिसी के अंतर्गत वरीयता दी जाएगी।

– वरीयता प्राप्त करने वाली कंपनियों में फॉर्च्यून ग्लोबल-500, फोर्ब्स ग्लोबल-2000, एशिया बेस्ट 200 व इकॉनमिक टाइम्स-200 की टॉप रैंकिंग वाली कंपनियां शामिल होंगी।

– इन्हें लाभ लेने के लिए संबंधित लिस्ट में शामिल होने का प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत करना होगा।

– इसके अतिरिक्त, 3 वित्तीय वर्षों में 1000 करोड़ से अधिक के एवरेज रेवेन्यू के साथ ग्रोथ दर्ज करने वाली कंपनियों को भी प्रस्तावित पॉलिसी के अंतर्गत वरीयता दी जाएगी।

– प्रोजेक्ट्स को इस पॉलिसी के अंतर्गत 3 केटेगरी की पात्रता सूची में रखा गया है।

– पहली केटेगरी में 201 से 750 करोड़ के पूंजी निवेश पर 100 से 200 एकड़ ( 4 प्लॉट अलॉटमेंट), दूसरी केटेगरी में 751 से 1500 करोड़ पर 201 से 300 एकड़ (6 प्लॉट अलॉटमेंट) तथा तीसरी केटेगरी में 1500 करोड़ के पूंजी निवेश पर 301 एकड़ से अधिक (08 प्लॉट अलॉटमेंट) निर्धारित की गई है।

– पहली केटेगरी में 5 वर्ष, दूसरी केटेगरी में 6 वर्ष तथा तीसरी केटेगरी में 7 वर्ष की परियोजना पूर्ति अवधि निर्धारित की गई है।

– परियोजना पूर्ति की अवधि में अधिकतम 2 वर्ष का एक्सटेंशन इंपावर्ड कमेटी की अनुशंसा पर दिया जा सकता है।

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