गाजियाबाद (TBC News)। रोटरी क्लब डिस्ट्रिक्ट 3012 के सदस्य एकेएस कैप्टन रोटेरियन डॉ. अनिल कुमार मोहिन्द्रू ने सामाजिक कार्यों में सहयोग करने के साथ ही एक ऐसा उदाहरण पेश किया, जिससे कई बीमार लोगों की मदद हो सकती है, साथ ही अन्य लोगों को प्रेरणा भी मिल सकती है। डॉ. मोहिन्द्रू ने अपने शरीर के सभी अंगों को दान देने का निर्णय लिया है। इसके लिए उन्होंने नेशनल आॅरगन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आॅरगनाईजेशन यानि नोटटो से रजिस्टेशन भी कराया है। नोटटो की ओर से डॉ. अनिल मोहिंद्रू को डोनोर कार्ड भी जारी कर दिया गया है। डॉ. मोहिन्द्रू ने बताया कि उन्होंने मृत्यु के बाद किडनी, हार्ट, इन्टेस्टाइन, पैनक्रियाज, लंग, लीवर, कोर्निया, हार्ट वाल्व आदि दान करने की इच्छा जताई थी, जिसे नोटटो ने स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा कि उन्हें आॅर्गन डोनर कार्ड मिल गया है। इस कार्य के मिलने से वे बहुत ही खुश है। स्वर्गीय जसवीर राय मोहिंन्दू्र के पूत्र डॉ. अनिल मोहिन्दू्र रोटरी क्लब 3012 के बेहद सक्रिय सदस्य है। क्लब की ओर से आयोजित होने वाले सभी कार्यक्रमों में वे बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। अब सभी अंगों को दान देने की घोषणा से दूसरों को भी प्रेरित करेंगे।
उन्होंने कहा कि भारत में अंगदान करने का प्रचलन नहीं है। कई संस्थाएं हैं, जहां अंगदान किया जा सकता है लेकिन बहुत ही कम संख्या में लोग अंग दान को राजी होते हैं।
उन्होंने कहा कि अंगदान करने से एक ओर जहां अंग का उपयोग किसी दूसरे के जीवन में खुशी लाने के लिए किया जा सकता है तो वहीं मेडिकल के क्षेत्र में रिसर्च के लिए भी अंगों का उपयोग किया जा सकता है।
बदल गया अंगदान का प्रावधान
सरकार ने अंगदान के प्रावधानों में बदलाव किया है। अब 65 साल से ज्यादा का व्यक्ति भी सरकार की वेटिंग लिस्ट में जगह पा सकेगा। वजह ये भी है कि कई बार किसी बुजुर्ग के डोनेट किए गए अंग को किसी युवा को लगा पाना मुमकिन ही नहीं हो पाता था। ऐसे में वो अंग बेकार जाता था क्योंकि सेंट्रल लिस्ट में तो बुजुर्ग मरीज शामिल ही नहीं था।
भारत में अंगदान दो तरह से किया जाता है
-मरने के बाद जो अंगदान किया जाता है उसे मेडिकल भाषा में कैडिवर डोनेशन कहा जाता है.
– जिंदा रहते हुए किसी के लिए अंगदान करना.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 9 जनवरी को राज्यों के संबंधित विभागों से मीटिंग करके अंगदान और ट्रांसप्लांट के नियमों में कुछ बदलाव किए हैं।
भारत सरकार ने डोमिसाइल की जरूरत को हटाए जाने का निर्णय लिया है। अब जरूरतमंद व्यक्ति देश के किसी भी राज्य में जाकर आॅर्गर्न प्राप्ति के लिए रजिस्टर कर सेकेगा और ट्रांसप्लांट भी करवा पाएगा।