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आध्यात्म

महाकुम्भ में संन्यासी अखाड़ों की नई विधायिका का चुनाव सम्पन्न

श्री पंचायती अखाड़ा महा निर्वाणी में 16 सदस्यीय विधायिका का हुआ चुनाव

आठ श्री महंत और आठ उप महंत अगले कुम्भ के लिए उठाएंगे दायित्व

संन्यासी अखाड़ों की काशी के लिए हुई रवानगी, नागा संन्यासी भी चले बाबा विश्वनाथ के दरबार

महाकुम्भ नगर। प्रयागराज महाकुम्भ से अखाड़ों के विदा होने का सिलसिला शुरू हो गया है। महाकुम्भ के सेक्टर 20 में बनाए गए अखाड़ा क्षेत्र में प्रमुख शैव अखाड़ों ने अपनी रवानगी के पूर्व संपादित होने वाली परम्परा और प्रक्रिया को पूरा कर लिया है। इसी के अंतर्गत अखाड़े में पंच परमेश्वर या नई विधायिका का चुनाव भी किया गया।

महानिर्वाणी अखाड़े में नई विधायिका का चुनाव
महाकुम्भ से विदा होने के पूर्व अखाड़ों में अपने नए पंच परमेश्वर या विधायिका की परम्परा है। प्रयागराज महाकुम्भ में भी इसका निर्वाह करते हुए श्री पंचायती अखाड़ा महा निर्वाणी ने अपनी नई विधायिका का चयन कर लिया। श्री पंचायती अखाड़ा महा निर्वाणी के सचिव महंत जमुना पुरी जी का कहना है श्री पंचायती अखाड़ा महा निर्वाणी अखाड़े में 8 श्री महंत और 8 उप महंत का चयन किया है। छावनी में धर्म ध्वजा के नीचे नए पंच परमेश्वर का चुनाव सम्पन्न हुआ। इस महाकुम्भ में जिन आठ श्री महंत का चयन किया गया है उसमें श्री महंत रविंद्र पुरी जी, श्री महंत रमेश गिरी जी, श्री महंत बंशी पुरी जी, श्री महंत विनोद गिरी जी, श्री महंत मृत्युंजय भारती जी, श्री महंत मनोज गिरी, श्री महंत प्रेम पुरी जी और श्री महंत गंगा गिरी जी शामिल हैं। इसी तरह जिन संतो को उप महंत या कारवारी का चयन हुआ है उसमें दिगम्बर शिव पुरी जी, दिगम्बर रवि गिरी जी , विश्वनाथ पुरी जी, रमाशंकर गिरी जी, मनसुख गिरी हो ब्रह्म नारायण पुरी जी और उमाशंकर गिरी जी शामिल हैं। पुरानी विधायिका के स्थान पर अब यह नई विधायिका अगले कुम्भ तक जिम्मेदारी संभालेगी।

काशी के लिए नए पंच परमेश्वर का प्रस्थान
श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के संतों ने काशी प्रस्थान के पहले प्रस्थान की अपनी अनुष्ठान की परम्परा का निर्वाह किया। अनुष्ठान के बाद धर्म ध्वजा की तनियां ढीली कर दी गई। अखाड़े के देवता की पूजा की गई। इसके पूर्व अखाड़े के सर्वोच्च पदाधिकारियों का चुनाव हुआ। अखाड़े के सचिव महंत जमुना पुरी बताते हैं कि पंच परमेश्वर काशी के लिए प्रस्थान कर गया है। अखाड़े का पंच परमेश्वर बाबा विश्वनाथ की अंतरग्रही पंचकोसी परिक्रमा करने के बाद महा शिव रात्रि में बाबा विश्वनाथ के दर्शन करेंगे। इसके पश्चात सभी संत अपने अपने स्थान के लिए रवाना हो जायेंगे।

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